उझानी

भगवान की शरण में जाने से इंसान को मिलती है जीवन में नई दिशाः स्वामी चैतन्य

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उझानी,(बदायूं)। ब्लाक क्षेत्र के गांव पटपरागंज मंे चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन स्वामी आधार चैतन्य ने भगवान विष्णु के परम भक्त धु्रव का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब वह अपने पिता की गोद में थे तब उनकी सौतेली मां ने गोद से उतार कर भगा दिया था इसके बाद धु्रव भगवान में लीन होकर उनके प्रिय बन गए। उन्होंने कहा कि अगर इंसान अच्छे कार्य करे तो वह भी ईश्वर को पा सकता है।

स्वामी चैतन्य ने कथा सुनाते हुए कहा कि राजा उत्तानपाद की दो रानियां थी जिनमें एक रानी सुरूचि अपनी सौतन से ईष्या करती थी। रानी सुनिति के पुत्र धु्रव जब एक बार अपने पिता की गोद में बैठे थे तभी रानी सुरूचि ने धु्रव को गोद से उतार कर महल से बाहर कर दिया था जिस पर धु्रव अपनी मां के पास गए तब मां ने उन्हें जगत पिता ईश्वर के पास जाने की सलाह दी जिस पर धु्रव ने जंगल में भगवान की आराधना कर उन्हें प्राप्त कर लिया। कथा के समापन पर भारी संख्या में मौजूद ग्रामीणों ने आरती उतार कर भगवान का भोग के प्रसाद का वितरण किया।

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